Saajan Ne Kholi Angiya – Swimming Pool Mein

Views: 26,177 - Posted on 23 May 2012

Users Ki Farmaish Pe Sajan Ne Kholi Angiya Ka Ek New Part Hazir Hai.. Is Bar Saajan Ne Swiming Pool Mein Angiya Kholi Aur Mast Mast Karname Kiye.

सखी चारों तरफ चांदनी थी,  हम तरण-ताल में उतरे थे,
जल तो कुछ शीतल था लेकिन,  ये बदन हमारे जलते थे,
जल में ही सखी सुन साजन ने,  मुझको बाँहों में भीच लिया,
उस रात की बात न पूंछ सखी,  जब साजन ने खोली अँगिया.

हर्षित उल्लासित मन से हमने, कई भांति जल में क्रीडा की,
साजन  ने दबा  उभारों को,  मन-मादक  मुझको पीड़ा दी,
यत्र-तत्र उसके चुम्बनों का,  मैंने जरा नहीं प्रतिकार किया
उस रात की बात न पूंछ सखी,  जब साजन ने खोली अँगिया.

मुझको बाँहों में उठा सखी, कभी जल में उछाल  के झेल लिया,
कभी मुझे पकड़ कर कम्मर से, जल में चक्कर सा घुमा दिया,
हाथों से जल मुझपे उछाल, कई भांति उसने चुहुल किया,
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

मैं भी साजन को छेड़त थी, कभी अंग को पकड़त छोड़त थी,
साजन की कमर, नितम्बों पर, कभी च्योंटी  काट के दौड़त थी,
साजन के उभरे सीने पर, मैंने दंताक्षर री सखी छाप दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी , जब साजन ने खोली अँगिया.

गर्दन, जांघें, स्तन, नितम्ब, पेडू पे होष्ठ-चिन्ह छापे गए,
ऊँगली-मुट्ठी के पैमाने से, वस्त्र सहित दृढ़ स्तन नापे गए,
होठों पे रख कर तप्त होठ, मुख में मुख का रस घोल दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

अब जहाँ- जहाँ साजन जाता, मैं वहाँ- वहाँ पर जाती थी,
उससे होने की दूर सखी, नहीं चेष्टा मैं  कर  पाती थी,
जल में डूबे द्रवित अंग लिए, नैनों से साजन को न्योत दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

सखी साजन ने जल के अन्दर, मुझे पूर्णतया निर्वस्त्र किया,
हाथों से जलमग्न उभारों को, कई भांति दबाकर छोड़ दिया,
जल में तर मेरे नितम्बों को, कई तरह से उसने निचोड़ दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

ऊँगली-मुट्ठी से वस्त्र रहित नितम्ब, नोचे-खरोचे-मसले गए,
आटे की लोई से स्तन द्वय, दबाये-भीचे-पकडे-छोड़े गए,
नितम्बों की गहन उस घाटी में, उँगलियों ने गमन भी खूब किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

स्तन की बोंडी पे चुम्बन ले, जिह्वा से उनको उकसाया,
पहले बोंडी मुंह अन्दर की, फिर अमरुद तरह स्तन खाया,
होंठ-जिह्वा-दांतों से दबा-दबा, सारा रस उनका चूस लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

साजन मेरे पीछे आया,  मुझे अंग की गडन महसूस हुई
स्तन से लेकर द्रवित अंग तक, उँगलियाँ की सरसरी विस्तृत हुई
दोनों हाथों में भीची कम्मर, और अंग पे  मुझे बिठाय लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

सखी साजन ने भर बाँहों में,  मेरे होठों को अतिशय चूमा,
जल में  जलमग्न स्तनों को, हाथों से उभार-उभार चूमा,
स्तनों के मध्य रख कर अंग को, उन्हें कई- कई बार हिलोर दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

होकर अब बड़ी बेसब्र सखी, मैं जल-तल  पर मछली सी मचली,
साजन का अंग पकड़ने को, मेरी मुट्ठी घडी-घडी फिसली
साजन की सख्त उँगलियों ने, अंग में कमल के पुष्प कई खिला दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

तरण-ताल के जल में सखी, हमरे अंग के रंग विलीन हुए
जल में चिकने होकर हमने, उत्तेजना के नए-नए शिखर छुए,
मैंने मुट्ठी से अंग के संग, साजन को  भाव -विभोर किया.
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

सखी साजन ने मुझको अपनी, निर्मम बाँहों में उठा लिया,
और ला के किनारे तट पे मुझे, हौले से सखी बिठाय दिया,
खुद वो तो रहा जल के अन्दर, मुझे जांघों से पकड़कर खीच लिया.
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

मैं कुहनी के बल बैठी थी, अंग उसके मुख के सम्मुख था,
मैं सोच-सोच उद्वेलित थी, मैं जानत थी अब क्या होगा
साजन ने अपनी जिह्वा से, मेरी मर्जी का सखी काम किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

मस्ती के मारे सुन री सखी, अब मुझको कुछ न सूझत था,
साजन होठों और जिह्वा से, मेरे अंतर्रस को चूसत था,
मैंने भी उठाकर नितम्ब सखी, मस्ती का उदाहरण पेश किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

साजन के होंठ तो चंचल थे, जिह्वा भी अंग पर अति  फिसली,
कुहनी के बल मैंने नितम्ब उठा, जिह्वा अंग के अन्दर कर ली
अंग में जिह्वा का मादक रस, सखी मैंने स्वयं उड़ेल लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

साजन का दस अंगुल का अंग, मुझे जल में और विशाल दिखा,
उसकी मादकता पाने को,  सखी मेरे मन भी लोभ उठा
मैंने जल में अब उतर सखी, साजन को किनारे बिठा दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

भीगे अंग को मुख के रस से, चहुँ और सखी लिपटाय दिया
होठों से पकड़ कर कंठ तरफ, मैंने उसको सरकाय लिया
नीचे के होंठ संग जिह्वा रख, मैंने लिप्सा अपनी पूर्ण किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

जिह्वा अंग को थी उकसाती, उसे होठों से मैं कसकर पकडे,
साजन के बदन में थिरकन के, सखी कई-कई अब बुलबुले उड़े,
अंग को जिह्वा-होठों से खीच, सखी मैंने कंठ लगाय लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

उसको करने से प्यार सखी, मेरा मन कभी न  भरता था,
मुंह का रस अंग भिगोने को, सखी कभी भी न कम पड़ता था
चूस- चाट- चटकार-चबा, कई बार उसे कंठस्थ  किया,
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

साजन भी अब जल में उतरे, मुझे अपनी बाँहों में  उठा लिया
फिर कम्मर से मुझे पकड़ सखी, अपने अंग पे जैसे बिठा लिया
अंग से अंग मिल गया सखी, अंग स्वतः ही अंग में उतर गया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

दस अंगुल के कठोर अंग ने, मेरे अंग में स्वछंद  प्रवेश किया
हम कम्मर तक डूबे थे सखी, जल में अंग ने अंग धार  लिया
साजन ने पकड़ नितम्बों से, थोडा ऊपर मुझे उठाय  लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

साजन के हाथों के आर-पार, मैंने जंघाएँ सखी फंसा लई
साजन की गर्दन में बाहें लपेट, नितम्बों को धीमी गति दई
दोनों हाथों से पकड़ नितम्ब, साजन ने उन्हें गतिमान  किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

मेरी गति से सखी जल के मध्य, छप-छप आवाजें होती थी,
मुख से निकली मेरी आह ओह, मेरे सुख की कहानी कहती थी
मादक अंगों की लिसलिसी छुअन, रग-रग को भाव बिभोर किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

जंघा से पार दो कठोर हाथ, नितम्बों को जकड़े- पकडे थे,
कभी उसने सहलाया उनको, कभी उँगलियों से गए मसले थे
मेरे अंग ने साजन के अंग की, चिकनाई सखी और बड़ा दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

साजन के अंग पे चढ़-चलकर, मैं सुख के शिखर तक जा पहुंची,
अंगों के घर्षण-मर्दन से, तन में ज्वालायें कई-कई धधकीं,
मैं जैसे ही स्थिर हुई सखी, साजन ने नितम्ब-क्रम चला दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

बृक्षों से लिपटी लता सदृश, अंग उसके अंग से चिपटा था
अंग घर्षण से निकले स्वर से, वातावरण बहुत ही मादक था
उसका अंग तो मेरे अंग के, जैसे कंठ के भी सखी पार गया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.

जल में छप-छप अंग में लप-लप, मुंह में थे आह-ओह के शब्द
साँसें थी जैसे धोकनी  हो, हमें देख प्रक्रति भी थी स्तब्ध
उसके जोशीले नितम्बों ने, जल में लहरें कई उठाय दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

साजन का सिर पकड़ के हाथों में, मुख उसके जिह्वा घुसाय दिया
होठों को होठों से जकड़ा, जिह्वा से जिह्वा का मेल किया
जैसे अंग परस्पर मिलते थे, जिह्वा ने मुख में वही खेल किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

साँसों की गति थी तूफानी, पर स्पंदन की उससे भी तेज
अंगों की तरलता के आगे, चांदनी भी थी जैसे निस्तेज
चुम्बन के स्वर, जल की छप-छप, साँसों के स्वर में घोल दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

अति तीब्र गति से सांसों के, तूफ़ान निरंतर बह निकले,
अति दीर्घ आह-ओह के संग, बदन कँपकपाए हम बह निकले,
अंग के अन्दर बने तरण ताल,  मन ने उनमे खूब किलोल किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

अंगों से जो रस बह निकले, अन्तरंग ताल के जल में मिले
सांसों में उठे तूफानों के, अब जाके धीमे पड़े सिले
तरण ताल में उठी लहरों ने, अब जाकर के विश्राम  किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

सब शांत हुआ लेकिन री सखी, मैं साजन से लिपटी ही रही
मेरे अंग में उसके अंग की सखी, गहन ऊष्मा घुलती रही
मुझे पता नहीं कब साजन ने, मुझे तट पर लाकर लिटा दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

मैंने खोली जब आँखें तो, साजन को निज सम्मुख पाया
होठों पर म्रदु मुस्कान लिए, उसे मुख निहारते हुए पाया
बाँहों से साजन को घेर सखी, तृप्त होठों से होठ मिलाय दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

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Sher O Shayari <3

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32 Responses to “Saajan Ne Kholi Angiya – Swimming Pool Mein”

  1. jansevak
    May 23, 2012 at 5:42 pm

    kya pora kavya sangrha chaap diya :-(

  2. deleted
    May 23, 2012 at 6:22 pm

    Yaar admin ye to Hindi font mein h and tablet mein hindi font Nazi host ….
    :(

    • Admin
      May 23, 2012 at 6:36 pm

      Bola tha na ki reliance ki mat le ab lele maje. Wait kar android 4.0 ke update ki

      • Himanshu.the.DON
        May 23, 2012 at 8:07 pm

        Admin bro tablet funbook 4.0 bhi kamyaab nai ha. Heavy apps chalane me speed slow hone lagti ha. Har 2-3 dino baad re-stor marna padta ha. Mere khyal se apple ipad 1 acha ha. Daam=15000

      • Admin
        May 23, 2012 at 10:56 pm

        abe jis kisi ko b tablet leni hai mere ko bata dena budget de dena achi cheez suggest kar dunga ;)

    • Prince - The Bad Guy
      May 23, 2012 at 9:07 pm

      Mere b android 2.3 galaxy ace ka yahi hal tha. No hindi font.
      But maine jam ke google kiya. Fone ko root kar diya. Aur ab hindi font use kar sakta hoo. But ek dikkat hai hindi rendering sahi se nahi aati. Mean wait kar lo android 4.0 ka.

      • Himanshu.the.DON
        May 24, 2012 at 9:13 am

        Prince yaar galaxy y me to hindi font hain. I am using galaxy y last 4month Aur google stor me ek app ki madad se hindi writting bhi hot jati ha. The samsung galaxy y is value for money phone and it killer apple iphone 3gs.

  3. salman faruki
    May 23, 2012 at 6:32 pm

    In a bar 1 Guy says 2 another “I slept wid ur mom last nite” D whole bar was waiting 4 d other Guy’s response. He laughs & says, “Lets go home dad, U r drunk”

  4. Salman faruki
    May 23, 2012 at 6:38 pm

    Pehle hath pe Phir hont pe Phir aankh pe Phir gaal pe Aur phir naak pe ?
    .
    .
    .
    .
    ?
    KISS
    Qadar MACHAR Tang Karty Hain na jab bijlee nahi hoti…!!

  5. funky
    May 23, 2012 at 6:52 pm

    Admin Bhai…aap ki style me bolta hu aaj :P

    http://nonvegjokes.com/sajjan-ne-kholi-angiya-sasural-mein-1521.html

    ye lo poora version padh lo :))

  6. Anuj
    May 23, 2012 at 7:01 pm

    hmm Baba ne itne mehnat se chapa hai to badhiya hi hoga……
    Kyoki maine nhi padha hai ise. Himmat nhi hui padhne ki :(

  7. zeeshan
    May 23, 2012 at 7:25 pm

    admin bhai yHa hindi ki kitaab kyun chaap di….????

    @salman nyc joke

    • Admin
      May 23, 2012 at 7:57 pm

      hindi mein bheja tha mene vesa hi chap diya

      padne ki himmat hi nahi hoti ek bar padke dala tha 3 bar bathroom jana pada aur fir laptop leke bathroom bethne pe puri hui thi :’( buhuhuhuh

  8. Priya
    May 23, 2012 at 8:02 pm

    1 aur boring poem :((
    maha bakwaas …

    • Anuj
      May 23, 2012 at 10:56 pm

      :tup

  9. Harendra chaudhary (hps)
    May 23, 2012 at 8:20 pm

    अति उत्तम काव्य रस एवँ इतनी मेहनत के लिये कोटि-कोटि सादर आभार

  10. Salman faruki
    May 23, 2012 at 8:46 pm

    Jab bhi ye cheez saamne aati he man karta he is hindi ki kitaab ko phaad du

  11. Nilesh {{*N¡£€$H*}}
    May 23, 2012 at 8:52 pm

    gd n9t frndz

  12. Dhiraj*
    May 23, 2012 at 9:27 pm

    hahahhaha!!…ok jay!!..tumhara intejaar krne se mujhe koi taqleef nhi hoti…kyunki tum yaado mein baato mein aur mere dil k sofe pe humesha jo baithe rehte ho…!!..ok gn frinds!!
    …puri duniya ko bhul sakta hoon par jay tumhein nhi…aur tum mujhe nhi!!..dua kro ki mein tumhara intejaar naa krun..dua yeh kro bus tumhein har din tumhein yaad kr liya krun jay!!
    …humari dosti k dhoodh mein pyaar ki chini ghuli hai jay!!..

    ..jay tumse kucch..share krna hai.
    ..mujhe kbhi miss na krna..kbhi khojne ki koshish na krna…bus sacche dil se apne dil k kisi kone mein mujhe jagah de dena..aur muje yaad krke..muskura dena..aur khna..tum humesha mere dil mein rahoge my sweetheart!!..tumhare lie ek song..kaise mujhe tum mil gye..kismat pe aae na yakeen..hahahaha!! tc n gn jay n friends!!

  13. deepak
    May 23, 2012 at 9:58 pm

    Snta:- Ye Thums Up Walo Ne Paresaan Kr Rkhhaa H.

    .
    . Bnta:- Q.???
    .
    .
    Snta:- Yar BV Roz Raat Ko Thodi Si Pila K Zid KrtiH CHALO AAJ KUCH TUFAANI KRTE H…

    • Niteshsomesay
      May 23, 2012 at 11:40 pm

      gud joke @deepak

  14. Niteshsomesay
    May 23, 2012 at 10:42 pm

    @Admin yaar aaj to tune pura paka diya..! :(

  15. aby
    May 23, 2012 at 10:46 pm

    @admin are admin ye hindi font mat daal yaar mere lgp500 cynogen mod pe ye font nanhi cal rahe!!! bhai plsss english vrgn bhi post karde yaar ……… aour bhai tere side raat 11:30 ke baat open nahi hoti in pune

    • Admin
      May 24, 2012 at 1:41 am

      Hmmm ab bhai hindi mein ayi thi ye kavita

      And site sirf kal hi band thi server mein k isi prob ki wajah se. Aj to chal rahi hai bhai

  16. RaMo
    May 23, 2012 at 10:55 pm

    Yeh kay tha
    kuy tha
    kis liya tha
    par ek baat hai
    bakwaas nai
    g@nd maru tha.

  17. deleted
    May 24, 2012 at 7:33 am

    Administration have read how to update reliance tab but it has 2.3.4 android …..
    How to update it to 4.0 ???

    And my dear friends who want to read in Hindi ….admin once told me that we should download opera mini from market

  18. salman faruki
    May 24, 2012 at 8:42 am

    Skin meets Skin When is that the skin meets skin, hair meets hair n balls disappear.. dirty mind its when u BLINK UR EYES

  19. salman faruki
    May 24, 2012 at 8:54 am

    Gurdas Maan: Santa ji, aapke bhai ki shaadi mein kitne gaane gaane hain, us hisab se rate lagega? Santa: 2-3 gaa kar prg shuru kar dena, baad mein sharabi baraat ne generator ki awaaz par hi naachte rehna hai

  20. salman faruki
    May 24, 2012 at 8:55 am

    “Wake up, son. It’s time to go to school!” “But why, Mom? I don’t want to go.” “Give me two reasons why you don’t want to go.” “Well, the kids hate me for one, and the teachers hate me also!” “Oh, that’s no reason not to go to school. Come on now and get ready.” “Give me two reasons why I should go to school.” “Well, for one, you’re 52 years old. And for another, you’re the PRINCIPAL!

  21. naveen
    May 24, 2012 at 10:22 am

    bhai log agr aap log tablet me opera mini use kar rhe ho to address bar me jakar. config: type karo aur power user setting aa jayega..usme. use bitmap font for complex scripts me. yes option select karlo aur save karlo phir hindi font support karega..

  22. Neeru
    May 26, 2012 at 5:03 pm

    What a sex story!! Bada maza aaya hoga Sajan aur uskee sajnee ko Aise na kiya to kya kiya

  23. CHUSIKA DHAWAN
    January 23, 2013 at 6:20 pm

    क्या वर्णन है मैं तो पढते पढते ही तृप्त और लिप्त हो गयी

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